Friday, August 14, 2015

चाचा की फेसबुक में चाची-2


डॉ. भानु प्रताप सिंह
चाचा अनार सिंह की फेसबुक पे नई-नई छोरिन कूं देखि कें चाची ने मेरी मदद लई। मैंने चाची की अनामिका के नाम से फेसबुक आईडी बनाई। मैंने एक चालाकी करी। चाची की फेसबुक पे फोटू चाची की नांय, सुंदर सी छोरी की लगाई। चाचा कूं फ्रेंड रुकेस्ट भेज दई। चाचा ने मस्त छोरी की फोटू देखि कें फ्रेंड रुकेस्ट सटाक से कनफरम कद दई। अब तो हमाई चाची अनामिका बनिकैं चाचा की फेसबुक में घुस गई। दोऊ दीदा गाड़-गाड़ कें फेसबुक कूं देखन लगी। 
चाची मौकौ देखि कें मेरे पास आई और बोलीं,  ‘लल्ला, अपने चाचा से फेसबुक पे मेरी चैटिंग-फैटिंग तो कराओ। नैक देखूं तो सई, उनके मन में का चल्लौए।’ 
मैं समझ गौ चाची आज अनामिका बनि कें चाचा की चालाकी पकरि कें रहेगी। तुम मोय सीधौ मति समझौ। मैंने आग में घी डारौ। चाचा कूं हैलो भेजी। चाचा ने नैंकऊ देर करे बिना हैलो कहा।  
मैंने चाची से पूछि कें लिखी- हाउ आर यू हैंडसम। 
अब तो चाचा की लार टपकन लगी। चाचा ने लिखा- थैंक्स, यू आर सो स्वीट और क्यूट..। 
 चाची ने पूछी- लल्ला, जे कूट का हौवे। 
मैंने कहा, चाची, कूट नांय क्यूट। या कौ मतलब है प्यारी। 
चाची- अच्छा, कड़ी खाये अपने चाचा कूं देख, मोते आज तक प्यार से नांय बोलो और अनामिका कूं मीठी और प्यारी बताय रौए। आज याई ये देखनौ है।
अब तो चैटिंग सुरू है गई। चाची बतात जाय रईं और मैं लिखत जाय रो।
चाची-सच्ची कै रएऔ का.. मैं कां ते स्वीट और क्यूट हूं?
चाचा-  आपकी आँखें करीना कपूर सी हैं। हँसी माधुरी दीक्षित सी है। बातें सोनाक्षी सिन्हा जैसी हैं। गुलाब जैसे गाल हैं। तुमन से बात करकें हमाई तो किस्मत खुल गई।
चाची- पर मोय तो तुमाई सकल कादर खान जैसी लग रई है। हरकतें तो शक्ती कपूर जैसी कर रए हो। बातें जानी लीवर जैसी हैं। लंगूर की तरह उछल रए हो।
चाचा- हा हा हा.. भौत मजाकिया हो। हमाई-तुमाई भौत पटेगी।
चाची- कैसें पटेगी.. मैं तो तुम्हारे बारे में कछू नांय जानती।
चाचा- देखो डीयर, हमारी राशि एक है। मैं अनार सिंह और तुम अनामिका। हम दोनों की रुचियां समान हैं। मुझे तुम्हारी जैसी छोरी की तलास थी।
चाची- तौ का तुम अबई कुंवारे हो? शादी चौं नांय करी अब तक? बैठे रहोगे कब तक?
चाचा- तुम का समझ रईं मेरो ब्याह है गयो है? अरे, मैं तो कुट्टु कुंआरौ हूं। मैंने आज तक काऊ छोरी से हाथ तक नांय मिलाओ।
चाची- सच्ची, खाओ मेरी सौं।
चाचा: तुमाई सौं। तुम्हारे होठन की सौं। तुम्हारी ठोड़ी की सौं। तुम्हारे गुलाबी गालन की सौं। तुम्हारे लम्बे-लम्बे बालन की सौं।
चाची: मेरी मम्मी आ रई हैं। कल्लि बात करूंगी। गुडनाइट।
चाचा: गुडनाइट, स्वीट ड्रीम, टेक केअर, मिस यू।
चाची ने मोते कई- देखि लई लल्ला अपने चाचा की कत्तूत। तुमाए चाचा ने न जाने कित्ती छोरी फँसाय रखी हैं। सादी कूं तीन साल है गए और कै रए हैं कि कुट्टु कुंआरौ हूं। जे कुट्टु कुंआरे तो सादी पैऊ  नाए। इनैं अनामिका में करीना कपूर नजर आय रई है और मैं फूलन देवी लगूं...।

Friday, July 25, 2014

कविता

कविता लिखना इतना सरल होता तो
सब तुलसीदास बन जाते

कविता लिखना इतना कठिन होता तो
कोई तुलसीदास नहीं बन पाता

कविता अगर केवल मनोभाव होती तो
सारी स्त्रियां कवयित्री बन जातीं

कविता अगर सौंदर्यवान होेती तो
कोई कुरूप नजर नहीं आता

कविता अगर कविता होती तो
कविता की महत्ता नहीं होती

डॉ. भानु प्रताप सिंह

Friday, July 19, 2013

कविता किस पर लिखूं..

सोचता हूं एक कविता लिख ही मारूं
पर किस पर लिखूं

मिड डे मील पर.. 
इसे खाने पर मौत है

संसद पर..
वहां अपराधी बैठे हैं

समंदर पर..
वह तो प्रदूषित हो गया है

राजनेताओं पर..
उनका कोई चरित्र नहीं है

राजनीति पर..
यहां जातिवाद, भ्रष्टाचार है

अफसरों पर..
वे तो बेलगाम हो चुके हैं

धर्म पर..
इसके नाम पर कट्टरता है

युवाओं पर..
वे मनमौजी हो गए हैं..

खुद पर..
जीवन क्षणभंगुर है

अब आप ही बताइए
कविता किस पर लिखूं..

भानु प्रताप सिंह
पत्रकार, आगरा

Thursday, July 11, 2013

मेरे ही गामन में


गांव, खेती-किसानी और ग्रामीण संस्कृति पर ब्रज भाषा में छंद प्रस्तुत हैं। इन्हें सुनेंगे तो आपको अपने गांवों की महक आएगी। आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है..

Wednesday, July 10, 2013

पत्रकार, फोटोग्राफर और सम्पादक पर व्यंग्य..

इस वीडियो में सुनिए चार छंद, जो पत्रकार, वरिष्ठ पत्रकार, छायाकार और सम्पादक पर लिखे गए हैं.. ब्रजभाषा में लिखने का प्रयास हुआ है.. आपको पसंद आएंगे..

तू किस खेत की मूली है...

देश के जाने-माने गीतकार गोपाल दास नीरज के जन्मदिवस पर आगरा में कवि सम्मेलन हुआ। नीरज जी के साथ मंच पर मुझ अकिंचन को भी काव्यपाठ का अवसर मिला। कविता कुछ इस प्रकार है-

बनिगौ-बनिगौ रे विधायक मेरो बाप कि तू किस खेत की मूली है..