Monday, July 8, 2013

कर लो सफल जवानी को...


पावन अतीत का धरो ध्यान और छोड़ो अब नादानी को
मातृभूमि हित मरकर जीकर कर लो सफल जवानी को

बसंत पंचमी को इक बालक
चला गया था  इस    जग से
हरो प्राण पर  धर्म न    दूंगा
यही वो कहता  था  सबसे
बनो ‘हकीकत’ मत होने        दो स्वधर्म की हानी को
मातृभूमि हित मरकर जीकर कर लो सफल जवानी को

इक राजा गिरि जंगल भटका
मातृभूमि की रक्षा को
कभी दासता मत स्वीकारो
याद करो उस शिक्षा  को
बनो ‘प्रताप’ मिटा दो     जग से जुल्मों की कहानी को
मातृभूमि हित मरकर जीकर कर लो सफल जवानी को

लंदन में रह   रहा  मगर  था 
सच्चा भारतवासी    वो
जलियांवाला बाग का बदला
खुद ही पहुंचा फांसी  को
बनो ‘ऊधम सिंह’ दुष्ट संहारो,तरस जाए जो पानी को
मातृभूमि हित मरकर जीकर कर लो सफल जवानी को..
- डॉ. भानु प्रताप सिंह, आगरा

2 comments:

  1. अच्छे गीत के लिए बधाई...

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  2. धन्यवाद सेंगर साहब.. छात्र जीवन मे यह गीत लिखा था..

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