प्रिय मित्रो,
आज से शुरू होने जा रहा है मेरी कविताओं का प्रकाशन,
इसके लिए चाहे मुझे क्यों न करना पड़े शीर्षासन।
सोच रहा था अपनी कविताओं की पुस्तक प्रकाशित करूंगा,
सबको दिखाने के लिए थैले में भरूंगा।
कविताओं का पांडुलिपि तैयार है,
पर किताब छापना भी व्यापार है।
सो फिलहाल विचार त्याग दिया है,
ब्लॉग का सहारा लिया है।
आप सबको कविताएं सुनाकर खूब बोर करूंगा,
जो न सुनेगा, उसके कान में जमकर शोर करूंगा।
तो मेरे साथियो, तैयार हो जाइए,
मेरे कविता संसार में डूब जाइए।
आज से शुरू होने जा रहा है मेरी कविताओं का प्रकाशन,
इसके लिए चाहे मुझे क्यों न करना पड़े शीर्षासन।
सबको दिखाने के लिए थैले में भरूंगा।
कविताओं का पांडुलिपि तैयार है,
पर किताब छापना भी व्यापार है।
सो फिलहाल विचार त्याग दिया है,
ब्लॉग का सहारा लिया है।
आप सबको कविताएं सुनाकर खूब बोर करूंगा,
जो न सुनेगा, उसके कान में जमकर शोर करूंगा।
तो मेरे साथियो, तैयार हो जाइए,
मेरे कविता संसार में डूब जाइए।
ब्लॉगिंग की दुनिया में स्वागत है ..
ReplyDeleteकविताओं की किताब का छापना भले ही व्यापार है ,
मगर किताब का मजा ही कुछ और है ,
खैर ब्लॉगिंग का सहारा लेना भी बुरा नहीं ,
तुम ले चलो अपनी कविताओं के संसार में,
हम डूबने को तैयार हैं .....
शुक्रिया शशि सिंघल जी
Deleteहम भी तैयार हैं आपको डुबोने के लिए
आपको तय करना है किस तरह डूबते हैं
This comment has been removed by the author.
ReplyDeleteblogging ki duniya mai hardik swagat hai aap to waisey hi facebook per bahut shoor kartey hai ab yaha bhi kariy
Deleteधन्यवाद डॉक्टर साहब..
Deleteआप तो बहुत पहुंचे हुए कलाकार हैं..
आपकी प्रतिक्रिया से मुझे बहुत बल मिला है..
chaliye kavita-kavita khelte hain....
ReplyDeleteये भी ठीक रहेगा.. वैसे भी हम खेल ही रहे हैं.. न जाने कौन खिलवा रहा है
ReplyDelete